‘महाराष्ट्र बंद’ का मिला-जुला असर

लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में सोमवार को आहूत ‘महाराष्ट्र बंद’ का मिला-जुला असर रहा। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किसानों ने बंद को पूरा समर्थन दिया, जबकि बंद को शहरी इलाकों में आंशिक समर्थन मिला।

‘महाराष्ट्र बंद’ का मिला-जुला असर

मुंबई, महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास आघाड़ी के घटक दलों की ओर से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में सोमवार को आहूत ‘महाराष्ट्र बंद’ का मिला-जुला असर रहा। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किसानों ने बंद को पूरा समर्थन दिया, जबकि बंद को शहरी इलाकों में आंशिक समर्थन मिला। सत्तापक्ष ने इस बंद को पूरी तरह सफल बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे पूरी तरह से फ्लाप करार दिया है।
कांग्रेस की ओर से बंद के समर्थन में राजभवन पर मौन आंदोलन किया गया। आंदोलन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि लखीमपुर खीरी में जिस तरह से आंदोलनकारी किसानों को कुचल दिया गया था, इससे लोगों में आक्रोश है। भाजपा विरोध की आवाज को खत्म कर रही है। इसे जनता समझ रही है। इसी वजह से राज्य की जनता बंद में खुद शामिल हुई है। राकांपा की ओर से मुंबई के हुतात्मा चौक पर प्रदर्शन किया गया। मौके पर राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य के जलसंसाधन मंत्री जयंत पाटिल, अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नवाब मलिक, सांसद सुप्रिया सुले सहित पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हुए। जयंत पाटिल ने कहा कि महाविकास आघाड़ी की ओर से लखीमपुर खीरी की घटना का शांतिपूर्ण निषेध व्यक्त किया जा रहा है।
शिवसेना की ओर दादर, विक्रोली, इस्टर्न हाइवे, ठाणे एवं अन्य इलाकों में जोरदार आंदोलन किया गया। शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या से देश सन्न है। महाविकास आघाड़ी की ओर से आहूत बंद में राज्य के किसानों ने शामिल होकर यह संदेश दिया कि वे देश के किसानों के साथ खड़े हैं।
उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि महाविकास आघाड़ी के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों में कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस बंद का आयोजन किया गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी की सरकार का महाराष्ट्र बंद आंदोलन सरकार प्रायोजित है। चंद कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी के महाराष्ट्र बंद को आम जनता का समर्थन नहीं मिला, इसलिए बंद पूरी तरह से फ्लाप साबित हुआ है।
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